१. पृष्ठभूमि
वर्तमान समयत पुर्बी नेपालेर झापा ,मोरंग आर सुनसरी जिल्लालात पारा पुर्व काल से रहते आशाल कोच समुदायला राजबंशी
नाम से परिचित छे | राजबंशीर अर्थ हसे राजार बंस अर्थात
राजबंशी ला राजार बंस हबार कारण राजबंशी कहसे इला काथासे कि प्रस्ट हसेकी एकटा
समयत राजबंशीला अक्तिसम्पन्न समृद्ध ,आफ्नार भासा ,सांसकृतिर साथ् राज्य सासन करिस्ले | राजबंशी लाक कोच
अथवा कोचे कहेके भी चिनाजासे | बर्तमान समयत कोशी नदिर से पुरुब भितिकार
तराइर जमिनखान प्राचिन प्राग जोतिस्पुर वा कामरूप राज्यर भितरत छिले कहेना इला कथा
इतिहासलात पाछी | रामायण ,महाभारत हिन्दु
धर्मेर तन्त्र पुराणलात भी प्रागजोतिस्पुर आर कामरूप राज्यार ब्याख्या कराल पाछी | माहाभारतेर समयत कामरूप राज्यर सिमा दख्खिन बोंगो सागर आर पछिम करोतिया नदिर
तक छिले |
उड समयत करोतिया नदिड एकटा बिसाल नदि छिले
बर्तमाननेर टिस्टा ,कोशी आर माहानन्द मिलिय एकटा बिसाल नदि
छिले | योगिनी तन्त्र आनुसार पछिम करोतिया नदिसे दिक्करबासिनी तक उत्तर कन्चगिरि ,पुरूप भिती तिर्थश्रेष्ठ दिक्षानदि ,दख्खिन भिती
ब्रम्हपुत्र आर लाक्षा नदिड तक कामरूप राज्यखान फैलाल छिले जाक पछुकर समयत
कामतापुर से चिनाल गेइस्ले | कोच सब्द संकोस सब्द से उत्पत्ति हवाल
सब्द हए | आसामत रहाल संकोश नदि आर नेपालेर कोशी नदिर बीचत रहबार लोक्लाक कोस कहेना
चिनाल जछे ओइड कोस सब्द बर्तमान समयत कोच नाम से परिचित छे |
